Tuesday, February 27, 2007

Yaadon ki baraath!!!

"ऊफ़.. आज की सिर दर्द मुझे पागल हि कर देगी.." रोहित आज की ओफ्फिस के सारे काम निपटा कर बाहर लिफ्ट को पकडने को दौड रहा था .
"क्यों साहिब ? ओफ्फिस के बाद भी कोइ मीटिंग है क्या ?" लिफ्ट ओपरेटर शामु ने तब पूछ्ते हुए सलाम मारी...
"ओह... आज घर जल्दि पहुंचकर थोडा आराम करलूं... ये सिर दर्द मेरे जान पर पडी हुइ है!!" रोहि यह केह्ता लिफ्ट के बाहार निकला... "अरे साहिब... मेम साब को आपकेे सिर पर एक जमदार मालिश देने को कहिये.." शामु ने कहा....
रोहित मन ही मन सोचने लगा.."वोह अगर घर मैं होती तो ईतनी झंझट नही होती..जब्से रूट कर माईके गयी है..तब्से पूरी तरह उल्झ्हन मैं जी रहा...तीन दिन मैं ऐसी हालात है तो फिर आगे पता नहिं क्या होगा?" रोहित अपना कार निकाल्ने लगा. पार्क के पास लाल बत्ति गीरि और जैसे पुरी शहर ही थम सि गई..." अभी ईस कम्बक्त सिगनल को गिरना था!!" रोहित की नजर पार्क कि तरफ ऊटी...पार्क मै एक नन्हा सा लडका अप्ने साईकल को सम्भालते गिरता जा रहा था...
"नहीँ...मैं फिर से गिर जाऊंगा..कल अनील साईकिल से गिर कर बहुत रो रहा था..मुझे नहीं चलाना..अनु चलो लूडो खेलेतें हैं"
" अरे..वोह तो अनिल का दुसरा दिन था..तुम त एक हफ्ते से सीख रहे हो..चलो रोहित ...मैं तुम्हारे साथ बैठती हुं.."
तभी ट्राफिक कि सिग्नल हटि... रोहित अपनी मुस्कराहट के साथ मन ही मन अप्ने आप को कोसने लगा.."तब मैने साईकिल नहीं गिराई...अनु को चोट नहीं पहुंचाना चाहता था...वह मेरे साथ थी... तब शायद मेरी समझने की ऊमर नही थी..." contd..